Dream come true

“Papa, one day I will fly this.” Pointing to the sky, twelve-year-old Monica said. Her father followed gesture of her hand where an airplane was drawing the line of clouds in the sky. Her father smiled and said “Okay.” Her dream had wings that day as her father had shown his faith in the same .                     Monica was a small town girl. She was from the middle class family and had never gone outside her city alone. At that point of time, she didn’t even know, how to drive a car? She just did a small accident with her Activa.  In the narrated circumstances, her dream to fly looked like nothing more than a wishful thinking.                     With the passage of time, as she grew older, her dream seem to have completely vanished as she got an admission in an enginnering college and started pursuing the same. But her father’s believe and faith was still alive who surprised her by asking, “is she ready to fly?”                                        Thereafter, she saw major turns in her life. For the first time in her life, she was going, not out of her city but abroad alone to fulfill her dream. She was nervous but equally excited to take her first step towards her dream which was earlier looked like a ‘Wishful Thinking’. She started walking alone and after that, she never looked back.                      A middle-class family girl from a small town saw the dream at the age of twelve and acheived it at the age of twenty two, simply because of her parents blessings and most importantly, her father’s unshaken belive in her dream.

सपना पूरा हुआ ।

“पापा, एक दिन मैं भी यह उड़ाऊँगी।” आसमान की ओर इशारा करते हुए आठ साल की मोनिका ने बोला। उसके पापा ने उसके हाथ का इशारा देखते हुए ऊपर देखा, एक हवाई जहाज अपने पीछे बदलो की रेखा खींचे जा रहा था। उसके पापा मुस्कुराए और बोले ” ठीक है ।” बस उस दिन से ही उसके सपनों की उड़ान शुरू हो गई थी।
मोनिका एक छोटे से कस्बे में रहने वाली लड़की थी। एक मिडिल क्लास परिवार से थी। उसने तो कभी अपने शहर से बाहर अकेले पांव नहीं रखा था । ना जाने इतना बड़ा सपना कैसे बुन लिया। सच ही कहते है सब दिमाग की बात होती है । सोच लो तो कुछ भी संभव है ।
पर जैसे जैसे वो बड़ी होती गई उसका सपना धुंधला होता गया। या फिर उसने सपना तो देख लिया था पर कभी उम्मीद नई की थी कि पूरा होगा । पर शायद उसके पापा के दिमाग़ में घर कर गया था ।
परिस्थिति एसी बनी की मोनिका को बिना मन के इनजिनियरिंग में दाखिला लेना पड़ा। फिर एक दिन उसके पापा ने बोला तुम्हें उड़ना था ना, तैयार हो जाओ। उसके पापा के लिए वो पल कभी बदला ही नहीं।वह अब 22 साल की थी पर उसके पापा के दिमाग़ में वो अभी भी आठ साल की थी जिसकी इचछा पूरी करनी बाक़ी थी ।उसके पापा ने अपने दिमाग में उसका सपना हमेशा जीवीत रखा।

बस फिर क्या था, उसके मानो पंख लग गए हो। अपने जीवन में वह पहली बार अकेले कहीं जा रही थी और वह भी अपने देश से बाहर। कुछ घबराई कुछ उत्साहित वह अपने सपने को पूरा करने अकेले चल पड़ी। उस के बाद उसने कभी पीछे पलट के नहीं देखा। एक छोटे से कस्बे की मिडिल क्लास परिवार की लड़की ने अपने माता पिता के आशीर्वाद से बाहर साल की उम्र में देखा सपना बाईस साल की उम्र में पूरा कर लिया।

ਅਧਿਕਾਰ ਪੂਰਨ ਅੰਕੁਸ਼ ਮਾਂ

ਮੈਂ ਪੁੱਛਿਆ, ਆਸ਼ਾ, ਮੈਂ ਤੁਹਾਡੇ ਬੱਚੇ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਕਰਾਂਗੀ, ਤੁਸੀਂ ਜਾਓ ਅਤੇ ਆਰਾਮ ਕਰੋ, ਤੁਸੀਂ ਰਸਮਾਂ ਵਿਚ ਰੁੱਝੇ ਹੋਏ ਹੋ ਅਤੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਵੀ ਫੜਿਆ ਹੈ. ਉਸਨੇ ਝਿਜਕਿਆ ਅਤੇ ਫਿਰ ਮੈਨੂੰ ਬੇਟਾ ਦੇਣ ਤੋਂ ਇਨਕਾਰ ਕਰ ਦਿੱਤਾ.
ਉਸ ਦੇ ਜਵਾਬ ਨੇ ਮੈਨੂੰ ਹੈਰਾਨ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਕਿਉਂਕਿ ਮੈਂ ਉਸ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਚੰਗੀ ਮਿੱਤਰ ਸੀ ਅਤੇ ਅਜਿਹੀ ਕਿਸੇ ਅਚਾਨਕ ਇਨਕਾਰ ਦੀ ਉਮੀਦ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੀ ਸੀ.
ਦਰਅਸਲ, ਆਸ਼ਾ ਨੇ ਇਕ ਮਹੀਨਾ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਬੇਟੇ ਨੂੰ ਜਨਮ ਦਿੱਤਾ ਸੀ। . ਇੱਕ ਬੱਚੇ ਦੇ ਜਨਮ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਉਸਦੀ ਜਿੰਦਗੀ ਸਿਰਫ ਉਸਦੇ ਬੱਚੇ ਦੇ ਦੁਆਲੇ ਘੁੰਮਦੀ ਸੀ.
ਸ਼ੁਰੂ ਵਿਚ, ਮੈਂ ਉਸ ਦੇ ਵਿਵਹਾਰ ਨੂੰ ਸਧਾਰਣ ਤਬਦੀਲੀ ਵਜੋਂ ਕਲਪਨਾ ਕੀਤੀ, ਪਰ ਸਮੇਂ ਦੇ ਨਾਲ, ਮੈਂ ਦੇਖਿਆ ਕਿ ਉਹ ਆਪਣੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਇਕ ਪਲ ਲਈ ਵੀ ਨਹੀਂ ਛੱਡਣਾ ਚਾਹੁੰਦੀ ਸੀ ਅਤੇ ਇੱਥੋਂ ਤਕ ਕਿ ਉਸ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਨਾਲ ਵੀ ਨਹੀਂ ਛੱਡਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਸੀ. ਉਸ ਤੋਂ ਇਸ ਵਤੀਰੇ ਦੀ ਕਲਪਨਾ ਕਰਨਾ ਆਮ ਗੱਲ ਸੀ, ਉਸਨੇ ਹੁਣ ਮੈਨੂੰ ਅਹਿਸਾਸ ਕਰਵਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਇਕ ਸ਼ਕਤੀਸ਼ਾਲੀ ਅਤੇ ਅਧਿਕਰਪੁਰਨ ਅੰਕੁਸ਼ ਮਾਂ ਬਣ ਗਈ ਹੈ ਜੋ ਆਪਣੇ ਬੱਚੇ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਲਈ ਆਪਣਾ ਆਰਾਮ, ਨੀਂਦ ਅਤੇ ਸਭ ਕੁਝ ਛੱਡਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ.
ਪਰ ਕਿਤੇ, ਮੈਂ ਉਸ ਦੇ ਅਧਿਕਾਰੀ ਅਤੇ ਸੁਰੱਖਿਆ ਵਿਵਹਾਰ ਦਾ ਕਾਰਨ ਜਾਣਦੀ ਸੀ. ਇੱਕ ਬੱਚੇ ਦੇ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਉਸਨੇ ਆਪਣਾ ਸੁਤੰਤਰ ਜੀਵਨ, ਆਪਣਾ ਅਭਿਲਾਸ਼ਾਤਮਕ ਕੈਰੀਅਰ(ਉਹ ਇਕ ਬੜੀ ਅਰਲਾਈਨ ਵਿਚ ਪਾਇਲਟ ਸੀ) , ਰਹਿਣ ਲਈ ਆਪਣੀ ਮਨਪਸੰਦ ਜਗ੍ਹਾ, ਸੰਖੇਪ ਵਿੱਚ, ਸਭ ਕੁਝ ‘ਆਪਣੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਪਾਲਣ ਲਈ ਛੱਡ ਦਿੱਤਾ ਸੀ, ਇਸ ਲਈ ਕੋਈ ਕਸਰ ਬਾਕੀ ਨਹੀਂ ਛੱਡ ਰਹੀ ਸੀ।ਹੁਣ ਤੱਕ, ਉਸ ਦੇ ਏਜੰਡੇ ਜਾਂ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੇ ਉਦੇਸ਼ ‘ਤੇ ਹੋਰ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਸੀ.
ਉਹ ਆਪਣੇ ਬੱਚੇ ਵਿਚ ਇੰਨੀ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋ ਗਈ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਆਪਣੀ ਵੱਖਰੀ ਪਛਾਣ ਨੂੰ ਭੁੱਲ ਗਈ ਹੈ. ਉਹ ਹੁਣ ਸਿਰਫ ਇਕੋ ਇਕ ਉਮੀਦ ਨਹੀਂ ਬਲਕਿ ਆਪਣੇ ਪੁੱਤਰ ਦੀ ਮਾਂ ਹੈ.
ਇਹ ਤਬਦੀਲੀ ਮੈਨੂੰ ਬਹੁਤ ਪਰੇਸ਼ਾਨ ਕਰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਮੈਂ ਸੋਚਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਉਹ ਕਿਸ ਹੱਦ ਤਕ ਅਤੇ ਕਿੰਨੀ ਦੇਰ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਚਲ ਸਕਦੀ ਹੈ? ਮੈਂ ਹੈਰਾਨ ਹਾਂ ਕਿ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ ਜਦੋਂ, ਜਦੋਂ ਉਸਦਾ ਬੱਚਾ ਵੱਡਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਉਹ ਆਪਣੇ ਆਪ ਹੀ ਚੀਜ਼ਾਂ ਕਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਵੇਗਾ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵਿਚ ਰੁੱਝ ਜਾਵੇਗਾ?
ਮੈਂ ਬੱਸ ਆਸ ਕਰਦੀ ਹਾਂ ਅਤੇ ਪ੍ਰਾਰਥਨਾ ਕਰਦੀ ਹਾਂ ਕਿ ਜਦੋਂ ਉਹ ਛੋਟਾ ਬੱਚਾ ਖੁੱਲ੍ਹੇ ਅਸਮਾਨ ਵਿੱਚ ਆਪਣੇ ਆਪ ਉੱਡਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਹ ਉਸ ਦਿਨ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋਵੇ।

अधिकारपूर्ण अंकुश मां

मैंने पूछा, आशा, मैं तुम्हारे बच्चे की देखभाल करूँगी, तुम जाओ और पूरा दिन आराम करो, तुम औपचारिक अनुष्ठानों में व्यस्त हो और बच्चे को भी पकड़े हुए हो। उसने संकोच किया और इसके बाद मना कर दिया कि मैं खुद उसका ख्याल रखूंगी।
उसके जवाब ने मुझे आश्चर्यचकित कर दिया क्योंकि मैं उसकी सबसे अच्छी दोस्त थी और इस तरह के अचानक तरीके से नहीं की उम्मीद नहीं कर रही थी।
दरअसल, आशा ने एक महीने पहले ही मातृत्व ग्रहण किया था। उसने एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चा होने के बाद, उसका जीवन केवल अपने बच्चे के इर्द-गिर्द घूमने लगा।
प्रारंभ में, मैंने एक सामान्य बदलाव के रूप में उसके व्यवहार की कल्पना की, लेकिन समय बीतने के साथ, मैंने देखा कि वह एक पल के लिए भी अपने बच्चे को नहीं छोड़ना चाहती है और यहां तक ​​कि अपने बच्चे को किसी के साथ छोड़ने या कहीं भी जाने के लिए तैयार नहीं है। उससे इस व्यवहार की कल्पना सामान्य थी, उसने अब मुझे एहसास दिलाया है कि वह एक शक्तिशाली और अतिसक्रिय मां बन गई है, जो अपने बच्चे की देखभाल करने के लिए अपने आराम, नींद और हर चीज को छोड़ ने के लिए तैयार है।
लेकिन कहीं ना कहीं, मैं उसके अधिकारी और सुरक्षात्मक व्यवहार का कारण जानती थी। एक बच्चा होने के बाद, उसने अपना स्वतंत्र जीवन, अपना महत्वाकांक्षी करियर, रहने के लिए अपना पसंदीदा स्थान, संक्षेप में, सब कुछ ’बस अपने बच्चे को अच्छी तरह से बढ़ाने के लिए त्याग दिया था और अब, वह अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही थी । अब तक, उसके एजेंडे या जीवन के उद्देश्य पर कुछ और नहीं था।
वह अपने बच्चे में इतनी शामिल हो गई है कि वह अपनी खुद की पहचान को पूरी तरह से भूल गई है। वह अब आशा नहीं बल्कि सिर्फ अपने बेटे की मां है।
यह परिवर्तन मुझे बहुत परेशान करता है और मुझे लगता है, किस हद तक और कितने समय तक वह इस तरह से चल सकती है? मुझे आश्चर्य है कि क्या होगा, जब उसका बच्चा बड़ा हो जाएगा, वह खुद से अपने काम करना शुरू कर देगा और अपने जीवन में व्यस्त हो जाएगा?
मैं बस आशा करती हूं और प्रार्थना करती हूं कि वह पर्याप्त रूप से आगे बढ़ने के लिए मजबूत हो जब उसका छोटा शिशु खुले आसमान में अपने दम से उड़ान भरने के लिए तैयार होगा।

Possessive Mother

I asked Asha, I will take care of your baby, you go and take rest as the whole day, you were busy in ceremonial rituals and was also holding the baby. She hesitated and said no, no, not required, I will take care of him.          

  I was bit surprised as I was her best friend and was not expecting NO in such an abrupt manner. 
        Asha embraced motherhood just a month ago when she delivered a baby boy. After having a baby, her life started revolving only around her baby.    

   Initially, I thought the same as a normal change but with the passage of time, I noticed she doesn’t loose sight of her baby even for a second and even is not ready to leave her baby with anyone or to go anywhere without him. The behaviour which seems normal change for me initially and has now made me realize that she has turned into possessive and overprotective mother who is ready to loose her comfort, sleep and everything just to take care of her child.             

   But somehow somewhere I knew the reason of her possessive & protective behaviour. After having a baby, she gave up her independent life, her ambitious career, her favourite place to live in, in short, everything just to raise her child well and now, she was not leaving any stone unturned just to achieve her purpose. As of now, there seems nothing else on her agenda or her purpose of life.       

  She is so much involved in her child that she has totally forgotten her own indetity. She is not Asha anymore but just a mother of her son.        

 This change botheres me, a lot and made me think, to what extend and  to how long, she can go on like this? I wonder what will happen, when her baby will grow up, will start doing his chores by himself and will get busy in his own life?       

 I just hope and pray, tomorrow, she be strong enough to adapt & move on when her little chick will be ready to fly by his own in the open sky.