छोटी बातें बड़ा असर…..

संजना अपने बेटे के साथ घर के बाहर खड़ी थी। तभी उसके सामने एक व्यक्ति उसके घर के गेट के सामने गाड़ी खड़ी करने लगा। संजना के मना करने पर वो बोला बस पांच मिनट का काम है बाज़ार में, फिर वह गाड़ी निकाल लेगा। संजना ने इशारा करके उसे बताया कि सामने ही बाज़ार में आने वाली गाड़ियों के लिए पार्किंग है, वहां गाड़ी खड़ी कर लीजिए और उसका कोई भुगतान भी नहीं है।
इतना सुनकर वो व्यक्ति गाड़ी में बैठा और पार्किंग की तरफ चल पड़ा। पर संजना कि हैरानी का ठिकाना नहीं रहा जब उसने देखा कि उसने गाड़ी अंदर पार्किंग में खड़ी करने ही बजाए उसके सामने बाहर सड़क पर ही एक दुकान के आगे खड़ी कर दी और चला गया। फिर संजना का ध्यान गया कि ऐसी ही तीन चार गाड़ियां ऐसे ही सड़क पर खड़ी थी और अंदर पार्किंग खाली थी।
असल में संजना का घर शहर के मुख्य बाज़ार में बीचों बीच था। वाहनों का आवागमन सारा दिन लगा रहता था। त्योहारों के दिनों में तो और भी यातायात जाम हो जाता था। लोगो को बहुत असुविधा होती थीं। इसी वजह से स्थानीय नगर निगम ने लोगो की समस्या देख कर यहां पर एक बड़े से मैदान में पार्किंग की मुफ्त व्यवस्था की थी। ताकि लोगो की गाड़ी सड़क में खड़ी ना हो और यातायात भी ना रुके।
पर उस दिन संजना को एहसास हुआ कि लोगो को हो क्या गया है?
क्या हमारा काम सिर्फ और सिर्फ सरकार या स्थानीय व्यवस्था में कमियां निकलने का ही है? अगर कोई काम अच्छा हुआ है तो हम उसकी तारीफ क्यों नहीं कर सकते? हमारा कोई नैतिक कर्तव्य नहीं है? दो मिनट ज्यादा दे कर कोई गाड़ी पार्किंग में खड़ी नहीं करना चाहता की समय बर्बाद होगा, पर उसके कारण सड़क पर जाने वाले लोगो , वाहनों को चाहे कितनी भी मुश्किल आ जाए।
पहले पार्किंग नहीं थी तो समस्या थी, अब है तो समस्या है। भाई इतना समय लगा कर कोई गाड़ी अंदर कैसे खड़ी करे? बहुत काम होता है ना! यह तो एक छोटी सी उदाहरण है। एक अच्छे नागरिक होने के अपने कर्तव्य तो हम निभा ही सकते है। और उसके लिए कुछ बड़ा नहीं करना पड़ता। छोटी छोटी सी बातें ही होती है जैसे गाड़ी पार्किंग में लगाना, पानी को व्यर्थ होने से रोकना, बिजली का जितनी जरूरत हो उतना प्रयोग करना, सड़क पर कचरा नहीं फेकना, प्लास्टिक का प्रयोग करने से बचना इत्यादि।
यह तो कुछ कुछ काम है, ऐसे छोटे छोटे काम करके थोड़ा थोड़ा अपनी तरफ से भी योगदान दे कर देखिए, अच्छा लगेगा। आवश्यक नहीं है कि देश की सेवा सिर्फ हमारे सैनिक या सामाजिक कार्यकर्ता ही कर सकते है, हम सब उसमे अपनी भागीदारी कर सकते है।